प्रत्येक कम्प्यूटर के लिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। संक्षेप में ऑपरेटिंग सिस्टम, निर्देशों का एक ऐसा समूह है, जो कम्प्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है। यह इनपुट युक्तियों (lnput Devices) द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों को कम्प्यूटर के समझने योग्य भाषा में अनुदित कर, कम्प्यूटर के माइकोप्रोसेसर को प्रेषित करता है और प्राप्त परिणामों को वापस संदेशों के रूप में मॉनीटर स्कीन अथवा प्रिन्टर अथवा अन्य आउटपुट युक्तियों (Output Devices) पर प्रेषित करता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम ठीक उसी तरह कार्य करता है, जिस तरह किसी ऑफिस में एक सेक्रेटरी (Secretary) कार्य करता है। जिस तरह सेक्रेटरी अपने बॉस (Boss) के द्वारा दिये गए आदेशों का पालन करता है, उसी तरह ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर द्वारा दिए गए आदेशों (Commands) का पालन करता है। ज्ञात हो कि अपने बॉस (Boss) द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करने के लिए सेक्रेटरी स्वतः ही निर्णय लेता है कि क्या करना है (What to do?), कैसे करना है (How to do?) और कब करना है (When to do?) ठीक इसी तरह, ऑपरेटिंग सिस्टम, यूज़र द्वारा दिए गए आदेशों (Commands) को सम्पादित करने के लिए खुद ही निर्णय लेता है कि क्या करना है (What to do?), कैसे करना है (How to do?) और कब करना है (When to do?)? हमारा कम्प्यूटर भले ही कितना ही आधुनिक क्यों न हो, हमारे पास कितना हो उत्कृष्ट एवं उच्च तकनीक का एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) क्यों न हो, फिर भी बिना ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के हम कम्प्यूटर पर कोई कार्य नहीं कर सकते हैं। इसका कम्प्यूटर में स्थापित होना अत्यन्त आवश्यक है। ये सॉफ्टवेयर्स (Softwares), जिनकी सहायता से कम्प्यूटर कार्य कर सकने की स्थिति में आता है, ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) सॉफ्टवेयर्स (Softwares) कहलाते हैं। यह कम्प्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware) एवं विभिन्न एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर्स (Application Softwares) के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है। इसके बिना कम्प्यूटर अपूर्ण है। इसको कम्प्यूटर की आत्मा भी कहा जा सकता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार
ऑपरेटिंग सिस्टम को निम्न तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है-बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating System), मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multiprogramming Operating System) और रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real-Time Operating System)।
(1) बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating System) - बैच ऑपरेटिंग सिस्टम, एक सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Single User Operating System) होता है; जो यूजर द्वारा दिए गए जॉब्स (Jobs) को एक-एक कर बैच (Batch) में एग्जिक्यूट (Execute) करता है। जॉब्स (Jobs) को प्रोसेस करने के लिए विभिन्न यूजर अपने-अपने डेटा और प्रोग्राम्स को इसको सौंप देते हैं। इसके पश्चात् यह एक समान जॉब्स (Jobs) का अलग-अलग समूह (Group) बनाकर उन्हें एक साथ कम्प्यूटर में लोड (Load) करता है। जब एक प्रोग्राम का एग्जिक्यूशन (Execution) समाप्त हो जाता है तो ऑपरेटिंग सिस्टम दूसरे प्रोग्राम को एग्जिक्यूट (Execute) करने के लिए लोड (Load) करता है। बैच ऑपरेटिंग सिस्टम उन एप्लीकेशन्स (Applications) के लिए उपयुक्त होता है, जिसमें कम्प्यूटेशन टाइम (Computation Time) अत्यधिक होता है और प्रोसेसिंग के दौरान यूजर के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती है। पे-रोल प्रोसेसिंग (Pay-Roll Processing), भविष्यवाणी (Forecasting) और सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis) ऐसे एप्लीकेशन के कुछ उदाहरण हैं।
(2) मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multiprogramming Operating System) -मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम एक साथ एक से अधिक प्रोग्राम अर्थात् जॉब (Job) को लोड (Load) करके एग्जिक्यूट (Execute) कर सकते हैं। मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के अग्रलिखित तीन स्वरूप हैं--
- मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Multiuser Operating System) -- यह ऑपरेटिंग सिस्टम किसी कम्प्यूटर सिस्टम के रिसोर्स (Resource) पर दो या दो से अधिक टर्मिनल (Terminal) के माध्यम से एक साथ एक्सेस (Access) करने की अनुमति प्रदान करता है। UNIX, मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम का एक ज्वलंत उदाहरण है।
- मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multitasking Operating System) -- मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम को मल्टीप्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multiprocessing Operating System) भी कहा जाता है। मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न जॉब्स (Jobs) को एक से अधिक प्रोसेसर (Processor) पर एक साथ एग्जिक्यूट करते हैं अर्थात् मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम्स, जॉब्स (Jobs) को एग्जिक्यूट करने के लिए एक से अधिक प्रोसेसर (Processor) को हैंडल (Handle) करते हैं। मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम, दो से अधिक प्रोसेस (Process) को एक साथ एग्जिक्यूट कर सकता है।
- रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real-Time Operating System) -- रियल टाइम आपरेटिंग सिस्टम में प्रत्येक जॉब (Job) को प्रोसेस कर उसे सम्पादित करने की एक निश्चित समयावधि होती है तथा उन्हें उस समयावधि के अंदर पूरा करना पड़ता है। रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रमुख उद्देश्य क्विक रेस्पॉन्स टाइम (Quick Response Time) का अत्यधिक उपयोग तथा यूजर का कार्य करना होता है। क्विक रेसपॉन्स टाइम (Quick Response Time) प्रदान करने के लिए ज्यादातर समय मेन-मेमोरी (Main-Memory) में प्रोसेसिंग होती रहती है। यदि कोई जॉब (Job) निर्धारित समयावधि (Fixed Deadline) के अन्दर पूरा नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति की डेडलाइन ओवररन (Deadline Overrun) कहा जाता है। रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम को डेडलाइन ओवरसन (Deadline Overrun) जैसी परिस्थिति को कम से कम घटित होने देना चाहिए। फ्लाइट कंट्रोल (Flight Control) और रीयल-टाइम सिमुलेशन्स (Real-Time Simulations), रीयल-टाइम एप्लीकेशन (Real-Time Applications) के उदाहरण हैं।

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