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Windows Operating System क्या है? | पूरी जानकारी |

 आज हम क्या पढ़ेंगे?


माइक्रोसॉफ्ट विंडोज एक तरह का ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह एक ऐसा प्रोग्राम है जो कंप्यूटर स्क्रीन पर सूचना दिखाने के लिए Graphics या Icons का इस्तेमाल करता है। हम सबको पता है कि माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका की कंपनी है और उसके मालिक बिल गेट्स हैं, इसलिए हम कह सकते हैं कि विंडोज़ ऑपरेटिंग के मालिक भी बिल गेट्स ही हैं।



माइक्रोसॉफ्ट ने अब तक कई विन्डोज़ आपरेटिंग सिस्टम विकसित किए हैं, जो स्टैण्ड-एलोन कम्प्यूटर (stand-alone computer) से लेकर लोकल एरिया नेटवर्क (Local Area Network) और वाइड एरिया नेटवर्क (Wide Area Network) तक के माहौल में कार्य करते हैं


माइक्रोसॉफ्ट ने सन् 1983 ई० में विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम पर कार्य करना प्रारम्भ किया। सबसे पहले 1983 ई० में माइक्रोसॉफ्ट ने विन्डोज़ के टेस्ट वर्जन (Test Version) को ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चर्स (Original Equipment Manufactures-OEMs) नामक सेलेक्ट ग्रुप (Select Group) को दिखाया। इनमें से ज्यादातर OEMS ने विन्डोज़ की अवधारणा (Concept) को अपनी स्वीकृति दे दी। इसके पश्चात् फरवरी, 1984 में विन्डोज़ टेक्नोलॉजी से सॉफ्टवेयर डेवलपर्स (Software Developers) को परिचित कराने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने एक सेमिनार (Seminar) का आयोजन किया जिससे कि सॉफ्टवेयर डेवलपर (Software Developers), विन्डोज़ एप्लीकेशन (Windows Application) विकसित कर सकें।


सेमिनार से प्राप्त हुए फीड बैक (Feeback) और निरन्तर शोध के पश्चात् विन्डोज़ को विकसित करने वाली सॉफ्टवेयर टीम (Software Team) ने यह निर्णय लिया कि विन्डोज़ में वर्चुअल मेमोरी मैनेजमेन्ट टेकनीक (Virtual Memory Management Technique) और डायनामिक लिंकिंग टेकनीक (Dynamic Linking Technique) को कार्यान्वित कर विन्डोज़ को उसके वास्तविक स्वरूप की अवधारणा से और भी बेहतर बनाया जा सकता है। ज्ञात हो कि वर्चुअल मेमोरी मैनेजमेंट (Virtual Memory Management) एक मेमोरी मैनेजमेंट टेकनीक (Memory Management Technique) होती है, जिसके द्वारा मेमोरी-साइज़ से भी बड़े प्रोग्राम को मेमोरी में लोड (Load) कर एग्जिक्यूट (Execute) किया जा सकता है।


वर्चुअल मेमोरी मैनेजमेंट टेकनीक (Virtual Memory Management Technique) में ऑपरेटिंग सिस्टम किसी प्रोग्राम को एक्जिक्यूट (Execute) करने के लिए उसे टुकड़ों (Segments) में विभाजित करके सेकेण्डरी स्टोरेज (Secondary Storage) से आवश्यकतानुसार स्वैप-इन (Swap-In) तथा मेमोरी से सेकेण्डरी स्टोरेज पर स्वैप आउट (Swap-Out) करता है। ज्ञात हो कि स्वैप-इन (Swap-In) का तात्पर्य प्रोग्राम को सेकेण्डरी स्टोरेज से मेमोरी में लोड (Load) करने से होता है तथा स्वैप-आउट (Swap Out) का तात्पर्य प्रोग्राम को मेमोरी से सेकेण्डरी स्टोरेज पर वापस भेजने से होता है। 

इसके पश्चात् विन्डोज़ में इन दोनों टेकनीक को कार्यान्वित किया गया और नवम्बर, 1985 ई० में माइक्रोसॉफ्ट ने विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम को व्यावसायिक तौर पर प्रस्तुत किया। आज विन्डोज़ पर्सनल कम्प्यूटर (PC) पर प्रयुक्त होने वाला एक लोकप्रिय एवम् सर्वप्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका है।


इसके पश्चात् मई, 1990 में विन्डोज़ का तीसरा संस्करण, Windows 3.0 के नाम से प्रस्तुत किया गया, जो अपने पिछले संस्करणों, Windows 1.0 और Windows 2.0 की तुलना में कहीं अधिक उपयोगी था। मई, 1992 में विन्डोज़ का अगला संस्करण Windows 3.1 के नाम से प्रस्तुत किया गया, जो 8086 और 80286 प्रोसेसर पर रन (run) नहीं कर सकता था, बल्कि उनसे समुन्नत (advance) प्रोसेसर पर रन (run) करता था। मार्च, 1993 में विन्डोज़ का अगला संस्करण Windows 3.11 के नाम से पेश किया गया, जिसे माइक्रोसॉफ्ट ने वर्कग्रुप (workgroup) में काम करने के हिसाब से डिजाइन किया था। अतः Windows 3.11 को विन्डोज़ फॉर वर्कग्रुप्स (Windows for Workgroups [WFW]) के नाम से भी जाना जाता है। जुलाई, 1993 में Windows NT नामक विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम को नेटवर्क में काम करने की क्षमता के साथ पेश किया गया। इसके पश्चात् अगस्त, 1995 में 18 महीने देर से Windows 95 को पेश किया गया। पुनः अगस्त, 1996 में Windows 95 का दूसरा संस्करण पेश किया गया, जिसे 950b तथा OSR2 के नाम से भी जाना जाता है। इस संस्करण में पिछली गलतियों को ठीक कर, कुछ और समुन्नत (advance) कम्पोनेन्ट (components) के साथ पेश किया गया। इसके पश्चात् सितम्बर, 1998 में Windows 98 को पेश किया गया, 2000 में Windows 2000, 2001 में Windows ME तथा 2002 में Windows XP को पेश किया गया। इसके उपरान्त Windows Vista, Windows 7 और Windows 8 संस्करण आ चुके हैं। विन्डोज़ का आगामी संस्करण संभवतः विन्डोज़ लांगहार्न (Windows Longhorn) के नाम से पेश किया जाएगा।


माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित किए गए सभी विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम, ग्राफिकल यूज़र इन्टरफेस अर्थात् जीयूआई (Graphical User Interface [GUI]) मुहैया कराते हैं। विन्डोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम से पहले के ऑपरेटिंग सिस्टम, कैरेक्टर यूजर इन्टरफेस (Character User Interface (CUI]) मुहैया कराते थे। 
उदाहरणस्वरूप- MS-DOS, सीयूआई (CUI) मुहैया कराता है। CUT में यूज़र को काम करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम के कमाण्डों के सिनटैक्स (syntax) को याद रखना पड़ता है और किसी कार्य को सम्पादित करने के लिए सम्बन्धित कमाण्ड को उसके सिनटैक्स (syntax) के अनुसार टाइप करना पड़ता है; जो आम यूज़र के लिए कठिन कार्य है। इसके ठीक विपरीत, GUI में कार्य करने के लिए यूज़र को कमाण्डों के सिनटैक्स (syntax) को याद रखते हुए सही-सही टाइप न कर, किसी कार्य की सम्पादित करने के लिए कमाण्ड विशेष को माउस से सेलेक्ट (select) कर उस पर क्लिक (click) भर करना पड़ता है।


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