आज हम क्या पड़ेंगे ?
दोहरा लेखा प्रणाली की अवधारणा (Concept of Double Entry System) -
प्रत्येक व्यावसायिक लेन-देन (Business Transaction) के दो पहलू होते हैं, दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) इन दोनों पहलुओं का विधिवत् लेखा करने की वैज्ञानिक पद्धति है।
दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) का प्रमुख आधार यह है कि प्रत्येक सौदे के दो पक्ष (Two Aspects) होते हैं। लेखाकर्म की जिस प्रणाली में प्रत्येक सौदे के इन दोनों पक्षों को यथास्थान लिखा जाता है, उसे दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) कहा जाता है। एक सौदे के दो पक्षों में से एक पक्ष को एक स्थान पर और दूसरे पक्ष को दूसरे स्थान पर लिखा जाता है; उदाहरण के लिए ₹500 सोहन को दिये गये। यह एक सौदा है जिसमें रुपये दिये जा रहे हैं और मोहन इन रुपयों का प्राप्तकर्ता है। इसके दो पक्ष हैं-पहला 'रोकड़ का जाना', और दूसरा 'मोहन का प्राप्त करना'।
इन दोनों पक्षों का लेखा जिस विधि के अनुसार किया जाता है, उसे दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) कहा जाता है।
प्रत्येक सौदे के दो पक्षों में से एक को Debit अथवा सूक्ष्म रूप में Dr. और दूसरे को Credit अथवा सूक्ष्म में Cr. किया जाता है Debit और Credit करने के लिए इस प्रणाली के अन्तर्गत कुछ नियम हैं जिनके आधार पर ही लेखे किये जाते हैं।
दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) के निम्नलिखित तीन मूलभूत सिद्धान्त हैं :
(1) प्रत्येक व्यावसायिक व्यवहार का प्रभाव कम-से-कम दो खातों में होना।
(2) प्रत्येक खाते में एक-दूसरे के विपरीत प्रभाव होना।
(3) लेखों के विपरीत खातों में समान धनराशि का प्रभाव होना।
डेबिट और क्रेडिट का आशय (Meaning of Debit and Credit) -
डेबिट (Debit) शब्द लैटिन भाषा के डैबिटम (Debitum) शब्द से बना है। इसका आशय उनसे देय (Due for that) है। वास्तव में, डेबिट (Debit) लेखाकर्म का एक चिह्न (Symbol) है। जिसका प्रयोग इसके नियमों को स्पष्ट करने एवं इन्हें क्रियाशील करने में किया जाता है।
क्रेडिट (Credit) शब्द लैटिन भाषा के 'क्रेडर' (Creder) शब्द से बना है। इसका आशय ख्याति से है। यह 'उसको देय' (Due to that) प्रकट करता है। यह भी लेखांकन में एक चिन्ह की तरह प्रयोग होता है। इसका प्रयोग लेखाकर्म नियमों को स्पष्ट करने एवं उन्हें क्रियाशील करने में किया जाता है।
दोहरा लेखा प्रणाली के फी़चर्स (Features of Double Entry System) -
दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) के प्रमुख लक्षण अथवा विशेषताएं निम्नलिखित हैं :
(1) वैज्ञानिक प्रणाली (Scientific System) – दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) के कुछ निश्चित नियम और सिद्धान्त होते हैं जिनके अनुसार प्रत्येक व्यापारिक लेन-देन (Business Transaction) के दोनों पक्षों का लेखा किया जाता है, इसलिए यह बुक-कीपिंग (Book-Keeping) की एक वैज्ञानिक पद्धति है।
(2) व्यापक प्रणाली (Comprehensive System) - दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) के अन्तर्गत प्रत्येक व्यापारिक लेन-देन (Business Transaction) के दोनों पक्षों का लेखा तो किया ही जाता है इसके अतिरिक्त यह प्रणाली सौदों के व्यक्तिगत और गैर-व्यक्तिगत दोनों पहलुओं का विवरण प्रस्तुत करती है, इसलिए यह व्यापारिक लेन-देनों (Business Transactions) का लेखा करने की एक व्यापक और वास्तविक प्रणाली है।
(3) दोनों पक्षों का लेखा ( Accounting of Both Sides) - दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) में हर सौदे को दो पक्षों अर्थात् खातों में लिखा जाता है। पाने वाले खाते को डेबिट तथा देने वाले खाते को क्रेडिट किया जाता है। इस प्रणाली का मूलभूत आधार यह है कि प्रत्येक डेबिट का एक क्रेडिट और प्रत्येक क्रेडिट का एक डेबिट होता है।
(4) गणितीय शुद्धता की जांच (Checking of Mathematical Accuracy) - दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) में प्रत्येक सौदे को दो पक्षों अर्थात् खातों में समान धनराशि लिखी जाती है। जो धनराशि एक खाते के डेबिट में लिखी जाती है वही धनराशि दूसरे खाते के क्रेडिट में लिखी जाती है। इस प्रकार वर्ष के अन्त में डेबिट वाले और क्रेडिट वाले खातों का योग बराबर होता है। यदि ऐसा नहीं है, तो यह माना जाता है कि खातों में कोई गणितीय अशुद्धि रह गई है।
(5) व्यापार की आर्थिक स्थिति का ज्ञान (Knowledge of Financial Condition of Business ) - दोहरा लेखा प्रणाली (Double Entry System) से वर्ष के अन्त में बनाये जाने वाले अन्तिम खातों (Final Accounts) से यह ज्ञात हो जाता है कि इस वर्ष में व्यापार का कितना लाभ अथवा हानि हुई, वर्ष के अन्त में कितनी लेनदारी और देनदारी है, व्यापार लगी पूंजी कितनी है एवं व्यापार की सम्पत्ति और दायित्व क्या है?

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