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INTERNET क्या है?

इंटरनेट क्या है? इंटरनेट का उपयोग


  परिचय (Introduction)

हैलो दोस्तों, स्वागत है आप सबका मेरे इस नए ब्लॉग में। आज मैं आपको अपने इस ब्लॉग के माध्यम से यह बताने की कोशिश करूंगा कि इंटरनेट (Internet) क्या है?, इसका इतिहास क्या है? इत्यादि। जैसा कि आप जानते हैं - 

इन्टरनेट (Internet) ने हमारे कार्य को तीव्र एवं सरल बना दिया है। यह ई-कॉमर्स (e-commerce), ऑनलाइन मीटिंग (Oniline meeting), ई-मेल (e-mail), विचारों (Ideas) को शेयरिंग (Sharing), ऑनलाइन डिस्टेन्ट लर्निंग एवं एजुकेशन (Online Distant Learning and Education) अर्थात ऑनलाइन दूरस्थ अधिगम एवं शिक्षा इत्यादि सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

 इन्टरनेट का प्रयोग शिक्षा (Education), व्यापार (Business), मनोरंजन (Entertainment), मेडिकल (Medical), संचार अर्थात कॉम्यूनिकेशन (Communication), शॉपिंग (Shopping), रिक्रिएशन (Recreation), इनवेस्टमेन्ट (investment) इत्यादि क्षेत्रों में हो रहा है।


इंटरनेट का आविष्कारक ( Inventor of Internet)


हम सबके दिल में कभी-न-कभी ऐसे सवाल जरूर आते होंगे, कि इंटरनेट का मालिक कौन? है या इंटरनेट को किसने बनाया होगा?

अगर हम इतिहास झांक-कर देखें तो, यूनाइटेड स्टेट के सुरक्षा विभाग (U.S. Defence Department) ने, सन् 1969 ई० में, एक ऐसे नेटवर्क का विकास प्रारम्भ किया, जो आण्विक आक्रमण के घटित होने की परिस्थिति में भी डेटा को ट्रान्सफर करने में सक्षम हो सके क्योंकि ऐसी परिस्थिति में टेलीफोन नेटवर्क्स में एक भी लाइन के नष्ट होने पर डेटा या इन्फॉर्मेशन का ट्रान्सफर नहीं हो सकता या फिर कोई भी नेटवर्क मेन नेटवर्क से विच्छेदित हो सकता है।

Vinton Cerf 



परंतु कुछ गु़मनाम लोगों के नाम हैं जिन्हें हम नहीं जानते जिन्होंने इंटरनेट की खोज में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसलिए हम कह सकते हैं कि इंटरनेट की खोज का मुख्य श्रेय महान‌ कंप्यूटर वैज्ञानिक Vinton Cerf और Robert Kahn को दिया जाता है।


भारत में इंटरनेट (Internet in India)


भारत में इंटरनेट के आने से बहुत सारी चीजें आसान हो गईं। 
भारत में‌ इंटरनेट के लगभग 23 साल हो चुके हैं। भारत में इंटरनेट की स्थापना 15 अगस्त, 1995 में विदश संचार निगम लिमिटेड ने की थी। 

इंटरनेट की अवधारणा (Concept of internet)


इन्टरनेट को सरलतापूर्वक परिभाषित करना कठिन है; क्योंकि यह केवल एक वस्तु नहीं है,  यह हजारों टेक्नोलाजीन और अनेक सर्विसेज (Services) का एक जटिल संयोजन (Combination) है, जिनका प्रयोग प्रतिदिन विश्व भर में लाखों
व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। वास्तव में इन्टरनेट अन्तरराष्ट्रीय नेवकों का एक नेटवर्क है, जो जाखों व्यापारिक संस्थाओं, सरकारी एजेन्सियों, शैक्षणिक संस्थाओं और व्यक्तियों को आपस में जोड़ना है।
इन्टरनेट विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिससे दुनिया भर में अनेक नेटवर्क जुड़े हुए हैं। अतः इसे तकनीकी रूप से इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि- "इंटरनेट हजारों-लाखों कम्प्यूटर-नेटवर्क्स का एक नेटवर्क है।" इन्टरनेट को हजारों-लाखों कम्प्यूटर नेटवर्स का एक संयुक्त नेटवर्क कहा जा सकता है, जिसमें प्रत्येक नेटवर्क के प्रत्येक कम्प्यूटर किसी भी नेटवर्क के किसी भी कम्प्यूटर से सूचनाओं का आदान-प्रदान (Exchange) कर सकते हैं।

इन्टरनेट पर दो समान नेटवर्क या भिन्न नेटवर्क के कम्प्यूटर एक-दूसरे से इन्फॉर्मेशन का आदान-प्रदान करने के लिये कुछ निश्चित नियमों (Rules) का अनुपालन करते हैं तथा इन नियमों के एक समूह (Set) को प्रोटोकॉल्स (Protocols) कहा जाता है। इन्टरनेट दो समान या भिन्न नेटवर्क्स के कम्प्यूटर्स के मध्य सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए दो प्रोटोकल्स-IP (Internet Protocol) तथा TCP (Transmission Control Protocol), जिन्हें TCP/IP के नाम से जाना जाता है, का प्रयोग करता है।

एक हाई-स्पीड नेटवर्क (High-speed Network) विभिन्न लोकल एरिया नेटवर्क्स (LANS) को इन्टरनेट से जोड़ता
है। इस हाई-स्पीड नेटवर्क को इन्टरनेट का बैकबोन (Backbone) कहा जाता है। बैकबोन (Backbone) हाई-स्पीड कम्यूनिकेशन लिंक्स (High-speed Communication Links) द्वारा निर्मित होता है जो किसी निजी कम्पनी के अधिकार क्षेत्र में होता है। भारत में इन्टरनेट का बैकबोन VSHE (Videsh Sanchar Nigam Limited) नामक कम्पनी के अधिकार क्षेत्र में है। इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (Internet Service Providers) [ISPs] ही बैकबोन से कनेक्शन्स (Connections) स्थापित कर सकते हैं।
तथा फिर इन्टरनेट को एक्सेस (access) करने का अधिकार किसी वाणिज्यिक संस्था या व्यक्ति विशेष को बेच सकते हैं।


इंटरनेट का इतिहास (History of Internet)


यूनाइटेड स्टेट के सुरक्षा विभाग (U.S. Defence Department) ने, सन् 1965 ई० में. एक ऐसे नेटवर्क का विकास प्रारम्भ किया, जो आण्विक आक्रमण के घटित होने की परिस्थिति में भी डेटा को ट्रान्सफर करने में सक्षम हो सके, क्योंकि ऐसी परिस्थिति में टेलीफोन नेटवर्क्स में एक भी लाइन के नष्ट होने पर डेटा या इन्फॉर्मेशन का ट्रान्सफर नहीं हो सकता या फिर कोई भी नेटवर्क मेन नेटवर्क से विच्छेदित हो सकता है।

परम्परागत टेलीफोन नेटवर्क में डेटा को ट्रान्सफर करने के लिए सर्किट स्विचिंग (Circuit Switching) नामक तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिसमें सेन्डिंग और रिसीविंग डिवाइसेस (Sending and Receiving Devices) के बीच एक डेडिकेटेड पाथ (Dedicated Path) स्थापित होता है। इस नेटवर्क को विकसित करने के लिए यूनाइटेड स्टेट के सुरक्षा विभाग ने ARPA (Advanced Research Projects Agency) के साथ हाथ मिलाया।

ARPA ने एक ऐसे नेटवर्क का निर्माण किया, जो BBN नामक कम्पनी द्वारा विकसित आई. एम. पी.-आई. एम. पी. (IMP- IMP) नामक प्रोटोकॉल का प्रयोग करता था। आई.एम.पी. (IMP) का पूरा नाम इन्टरफेस मैसेज प्रोसेसर्स (Interface Message Processors) है। इस नेटवर्क को ARPANET के नाम से जाना गया।

ARPANET की स्थापना के पश्चात् इससे नए-नए नेटवर्क जुड़ने को उत्सुक हुए परन्तु IMP-IMP प्रोटोकॉल एक से अधिक नेटवर्क को एक नेटवर्क के रूप में रन (Run) करने में सक्षम न हो सका। अतः अब ऐसे प्रोटोकॉल्स को विकसित करने की आवश्यकता प्रतीत हुई, जो एक से अधिक नेटवर्क्स को एक साथ जोड़कर एक नेटवर्क के रूप में कार्य करने में सक्षम हो। 
बरकेली (Berkely) स्थित कॅलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने TCP/IP नामक प्रोटोकॉल विकसित किया, जिसे बरकेली-यूनिक्स-4.2 BSD (Berkely Unix-4.2 BSD) में इन्टीग्रेट (Integrate) किया गया TCP/IP के माध्यम से किसी भी लोकल एरिया नेिटवर्क (LAN) को ARPANET से जोड़ना काफी आसान था।

1970 के दशक के उत्तरार्द्ध में यूनाइटेड स्टेट के NSF (National Science Foundation) ने विश्वविद्यालयों में शोधकर्ताओं के शोधकार्य में डाटा/इन्फॉर्मेशन को देश भर में शेयर (share) करने में ARPANET के प्रभाव का विश्लेषण किया तथा यह पाया कि इस कार्य के लिए विश्वविद्यालयों को सुरक्षा विभाग (Department of Defence) से अनुमति लेने की आवश्यकता होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए NSF ने CSNET नामक नेटवर्क की स्थापना की, जो ARPANET तथा अन्य नेटवर्क्स से जुडा़ हुआ था। सन् 1983 तक ARPANET एक स्थापित और सफल नेटवर्क सिद्ध हो चुका था, जिससे 200 से अधिक नेटवर्क जुड़ चुके थे। इन 200 नेटवकों में 160 नेटवर्क DCA (Defence Communication Agency) के थे, जिसे 1983 में ही MILNET नाम से ARPANET से प्रबन्धन कारणों से पृथक कर एक सबनेट (subnet) के रूप में स्थापित किया गया। 1980 के दशक में अनेक नेटवर्क, विशेष रूप से लोकल एरिया नेटवर्क, ARPANET से जुड़े।

ARPANET में जैसे जैसे नेटवर्क्स की संख्या बढ़ती गई, इसमें किसी भी होस्ट (Host) को ढूंढना ख़र्चिला सिद्ध होता गया। अतः मशीनों को व्यवस्थित करने के लिए डीएनएस (DNS) अर्थात् डोमेन नेमिंग सिस्टम (Domain Naming System) की रचना की गई।

1980 के दशक के उत्तरार्द्ध में NSF (National Science Foundation) ने एक हाई-स्पीड नेटवर्क (High Speed Network) की स्थापना की जिसे NSENET के नाम से जाना जाता है, जिसकी बैकबोन (Backbone) में छह सुपर-कम्युटर थे और प्रत्येक सुपर-कम्प्यूटर एक LSI-II नामक मिनी कम्प्यूटर से जुड़ा हुआ था, जिसे फज़वॉल (Fuzball) के नाम से जाना जाता था। NSFNET से अनेक कॉलिज और विश्वविद्यालय जुड़े अतः साइट्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। आंकड़े बताते हैं कि सन् 1987 में NSFNET से 10,000 साइट्स तथा 1989 तक 1,00,000 साइट्स जुड़ गई थीं इसका एक कारण यह भी था कि इस समय तक ARPANET और NSFNET एक दूसरे से जुड़े हुए थे। इसी प्रकार अन्य देशों के भी विभिन्न नेटवर्क NSENET से जुड़ रहे थे। NSFNET भी TCP/IP प्रोटोकॉल का प्रयोग करता था।

सन् 1990 में ARPANET को NSFNET और अन्य नये नेटवर्क्स द्वारा टेकओवर (Takeover) कर लिया गया, अतः इसे बंद कर दिया गया; परन्तु यह सभी जगह नेटवर्क - शोधकर्ताओं के दिलो-दिमाग में बसा रहा। ARPANET के बन्द होते ही, यूनाइटेड
स्टेट में सभी नेटवर्क NSFNET से जुड़ने लगे। परिणामस्वरूप, NSFNET में नेटवकों की संख्या में अचानक तेजी से वृद्धि हुई। विश्वभर में बड़े पैमाने पर फैले कम्प्यूटर के इसी समूह को पहले internet कहा जाता था और अब Internet कहा जाता है। 

1990 तक इन्टरनेट से 3000 नेटवर्क और 200,000 कम्प्यूटर जुड़े हुए थे। 1995 तक सैकड़ों क्षेत्रीय नेटवर्क्स (Regional Networks), हजारों लोकल एरिया नेटवर्क्स (LANS) और लाखों प्रयोगकर्ता (Users) इन्टरनेट से जुड़ चुके थे। आज के परिप्रेक्ष्य में इंटरनेट से 100 देशों में 100 लाख से अधिक प्रयोगकर्ता जुड़े हुए हैं। तो यह था इंटरनेट का पूरा इतिहास।


इंटरनेट के उपयोग (Uses of Internet)


जब से इंटरनेट की खोज हुई है इसने हमारे जीवन में एक क्रांति सी ला दी है। मेरे कहने का तात्पर्य है कि इंटरनेट के आने से हमारे कई काम अब और आसान हो गए हैं, हम एक दूसरे से बातें कर सकते हैं, चैट कर सकते हैं और कई अन्य काम कर सकते हैं।
यह इंटरनेट का जमाना है, इंटरनेट स्टूडेंट्स के ज्यादातर काम आता है। वैसे तो इंटरनेट के इतने उपयोग‌ हैं कि उन्हें गिनाया नहीं जा सकता। 
परंतु मैं फिर भी इंटरनेट के कुछ मुख्य उपयोग बताने की कोशिश करूंगा:-

  • जानकारी इकट्ठी करने के लिए

 जब हमें कुछ पता करना होता है तो हम गूगल का इस्तेमाल करते हैं या फिर किसी और चीज का इस्तेमाल करते हैं लेकिन यह सब इंटरनेट से ही चलते हैं तो यह भी इंटरनेट का एक मुख्य उपयोग है।

  • सूचनाओं को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए

 हम इंटरनेट की मदद से फोटो, फाइल, चैट या फिर और कुछ या फिर अपने संदेश एक जगह से दूसरी जगह बड़ी आसानी से भेज सकते हैं।

  • मनोरंजन का साधन

इंटरनेट की मदद से हम मोबाइल एवं टेलीविजन पर फिल्में, गाने, कार्टूंस और तरह-तरह की मनोरंजन करने वाली चीज देख सकते हैं।

  • शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी

इंटरनेट की मदद से स्कूलों में पढ़ाना बहुत आसान हो गया है। स्टूडेंट को आसानी से टेलीविजन की मदद से पड़ाया जा सकता है, कंप्यूटर सिखाया जा सकता है और इंटरनेट की मदद से स्टूडेंट्स तमाम तरह की चीजें सीख सकते हैं।

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